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अमेरिका-ईरानी द्वंद्व में फसता भारत

अमेरिका-ईरानी द्वंद्व में फंसता भारत।

जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे थे तभी रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव लड़ते समय चुनावी मुद्दों में अपनी नीतियों की ओर इशारा कर दिया था। उसमे ईरान के साथ सम्बन्ध एक प्रमुख चुनावी मुद्दा था। चुनाव होने के बाद जब डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति बने तो उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा ईरान से किया गया परमाणु समझौता रद्द कर दिया और इस प्रकार धीरे-धीरे ईरान से अमेरिका के सम्बंध बिगड़ने लगे। कुछ दिन पहले ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा था कि अमेरिका ने उस पर साइबर अटैक किया है और उसकी सरकारी साइटों को हैक करने का प्रयास कर रहा है फलस्वरूप, ईरान ने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया जो ईरान की जासूसी कर रहा था। इससे तिलमिलाए अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर आक्रमण की घोषणा भी कर दी थी परन्तु 10 मिनट पहले वापस ले लिया। परन्तु दोनों के मध्य द्वंद्व युद्ध छिढ गया गया है।

दोनों के मध्य इस द्वंद्व युद्ध मे भारत पिसता नजर आ रहा है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर ईरान से तेल लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत को ईरान से तेल लेने की छूट 2 मई तक ही थी अब इसके बाद भारत ईरान से तेल आयात नही कर पायेगा। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है। ईरान भारत का इराक और सऊदी अरब के बाद तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश था। परन्तु भारत पर पाबंदी लगने से उसकी समस्या बढ़ जाएंगी। साथ ही साथ ईरान के भारत के साथ सम्बन्ध भी अच्छे थे परन्तु अब इससे सम्बन्ध में भी खटास आ सकती है।

अभी कुछ दिन पहले जब ब्रिटेन ने ईरान के टैंकर 'ग्रेस-1' को जब्त किया तो ईरान ने भी जवाबी कार्यवाही में ब्रिटेन के जहाज 'स्टेना इम्पेरों' को पकड़ लिया है। इन दोनों में भारतीय नागरिक थे। ईरान द्वारा पकड़े गए जहाज में  30 भारतीय थे जिनमें से 9 को ईरान रिहा कर दिया है जबकि 21 अन्य अभी भी ईरान में बंदी है। तथा ब्रिटेन द्वारा पकड़े गए जहाज में भी 24 भारतीय नागरिक हैं। उम्मीद करता हूं सभी 45 नागरिक जल्दी ही छुड़वा लिए जाएंगे। ये घटना भी अमेरिकी-ईरानी सम्बन्ध का परिणाम है।

अमेरिका ईरान पर प्रतिबंध पर प्रतिबंध मात्र इसलिए लगा रहा है क्योंकि उसका मानना है कि ईरान परमाणु बम बना रहा है परन्तु इसमें भी कोई संदेह नही है कि अमेरिका की नजर ईरान के तेल खदानों पर है। अमेरिका को पता है कि ईरान की जीडीपी तेल निर्यात पर ही टिकी है इसलिए वह भारत सहित अन्य देशों पर प्रतिबन्ध लगा रहा है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा जाए। सच भी है जो ईरान प्रतिबन्ध से पहले 250 लाख बैरल तेल का निर्यात करता था वह अब मात्र 3 लाख बैरल के आसपास पहुंच गया है।

इस प्रकार अमेरिका और ईरान के इस द्वंद्व युद्ध में भारत पिसता नज़र आ रहा है। भारत भी अमेरिका-ईरान के मध्य सम्बन्धों को सुदृढ़ करने में लगा है। भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से इस सम्बंध में बात भी की कि ईरान से सम्बन्ध अच्छे करने के लिए अन्य विकल्प क्या हो सकते हैं? अगर अमेरिका व ईरान के मध्य सम्बन्ध अच्छे नही हो रहे तो भारत को आर्थिक व राजनीतिक रूप से बहुत नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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